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आज रहेगी फ्री एंट्री विश्व धरोहर दिवस 2026,18 april ताज और आगरा किला देखने का सुनहरा मौका,

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  आगरा की ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से निहारने का सपना देखने वालों के लिए आज का दिन बेहद खास है। 18 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'विश्व धरोहर दिवस' मनाया जा रहा है, और इस विशेष अवसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पर्यटकों को एक शानदार तोहफा दिया है। आज आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, ऐतिहासिक आगरा किला और  फतेहपुर सीकरी सहित देश के सभी संरक्षित स्मारकों में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा । इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को अपनी गौरवशाली विरासत और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। हालांकि, पर्यटकों को यह ध्यान रखना होगा कि ताजमहल के मुख्य गुंबद (Main Mausoleum) में जाने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगा, जो भीड़ प्रबंधन के नियमों के तहत लागू है। मुख्य परिसर में प्रवेश के लिए आज किसी भी टिकट की आवश्यकता नहीं होगी और टिकट विंडो बंद रहेंगी। हर साल 18 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 2026 के लिए इस दिन की थीम 'आपदाओं और संघर्षों के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया' रखी गई है।...

अंडमान-निकोबार तो इन खूबसूरत जगहों को na भूलें

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  अंडमान और निकोबार आइलैंड दक्षिण-पूर्व में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत जगह है, जहां नीला समुद्र, सुनहरी रेत और रिच बायो डायवर्सिटी टूरिस्टों को अट्रैक्ट करती है। यह द्वीप समूह अपने खूबसूरत समुद्री जीवन, ऐतिहासिक स्थलों और रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स के लिए फेमस है। यहां की संस्कृति और नेचर का अनोखा संगम इसे हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट में शामिल करता है। अगर आप इस स्वर्ग का आनंद लेना चाहते हैं,तो यहां की ये खास जगहें जरूर देखें। आइए जानते हैं इनके बारे में- हैवलॉक आइलैंड हैवलॉक आइलैंड अंडमान का सबसे फेमस टूरिज्म स्थल है, जहां सफेद रेतीले तट और नीला समुद्र मन मोह लेते हैं। राधानगर बीच को एशिया का सबसे खूबसूरत समुद्र तट माना जाता है। यहां  स्कूबा डाइविंग  और स्नॉर्कलिंग का अनुभव अविस्मरणीय होता है। नील आइलैंड नील द्वीप, जिसे अब ‘शहीद द्वीप’ के नाम से भी जाना जाता है, अपने आप में सम्पूर्ण प्राकृतिक सुंदरता का खजाना समेटे हुए है। यहां लक्ष्मणपुर, भरतपुर और सीतापुर जैसे समुद्र तटों की शांति और नीला पानी सुकून देने वाला अनुभव प्रदान करता है। बाराटांग आइलैंड बाराटांग आइलैंड अपने अद्भुत ला...

राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ बनी सबसे महंगी भारतीय कला कृति

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  मुंबई में हाल ही में हुई एक ऐतिहासिक नीलामी ने भारतीय कला जगत में नया अध्याय जोड़ दिया। प्रसिद्ध भारतीय कलाकार राजा रवि वर्मा की कालजयी पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ ने वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ कीमत हासिल की।इस ऑयल पेंटिंग को साइरस पूनावाला, चेयरमैन, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ₹150.36 करोड़ ($17.9 मिलियन) में खरीदा, जो किसी भी आधुनिक भारतीय कलाकृति के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत है।1890 के दशक में बनाई गई यह कलाकृति माँ और पुत्र के पवित्र रिश्ते को बेहद भावनात्मक और जीवंत तरीके से दर्शाती है। नीलामी के दौरान यह पेंटिंग अपने अनुमानित मूल्य ₹72 करोड़ से ₹108 करोड़ को काफी पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना गई। साइरस पूनावाला ने पेंटिंग खरीदने के बाद इसे एक “राष्ट्रीय खजाना” बताया और यह इच्छा जताई कि इसे सिर्फ निजी संग्रह तक सीमित न रखकर समय-समय पर जनता के लिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।कला विशेषज्ञों ने इस निर्णय की सराहना की, क्योंकि यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और साझा करने में मदद करेगा। राजा रवि वर्मा: जीवन और कला राजा रवि वर्मा (29 अप्रैल 1848 – 2 अक्टूबर 1906) भारतीय ...

हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है

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  हर साल  1 अप्रैल  को पूरी दुनिया में  'अप्रैल फूल' (April Fool)  या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है । इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मज़ाक (pranks) करते हैं और एक-दूसरे को 'बेवकूफ' बनाकर आनंद लेते हैं। इसे मनाने के पीछे सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक कारण नीचे दिए गए हैं: कैलेंडर में बदलाव (फ्रांस):  16वीं सदी (1564/1582) में फ्रांस ने  जूलियन कैलेंडर  की जगह  ग्रेगोरियन कैलेंडर  अपनाया। इसके बाद नया साल 1 अप्रैल के बजाय  1 जनवरी  से शुरू होने लगा। उस समय सूचना के अभाव में कई लोग 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। ऐसे लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए उन्हें "अप्रैल फूल" कहा जाने लगा। हिलारिया उत्सव (रोम):  प्राचीन रोम में मार्च के अंत में  'हिलारिया'  नाम का त्यौहार मनाया जाता था। इसमें लोग वेश बदलकर एक-दूसरे की नकल उतारते थे और हंसी-मज़ाक करते थे, जिसे अप्रैल फूल की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। अप्रैल फिश (April Fish):  फ्रांस में जिस व्यक्ति को मूर्ख बनाया जाता है, उसे 'पोइज़न द एप्रिल' (अप्रैल फि...

ऋषिकेश का अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव: आत्मा की यात्रा का अनुभव

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  मार्च की शुरुआत में ऋषिकेश में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव दुनिया  में  भर में प्रचलित है। योग अब एक वैश्विक घटना बन चुका है। महोत्सव हर साल मार्च में आयोजित होता है और यह दुनिया भर से योग प्रेमियों को आकर्षित करता है। भारत के हर कोने से लोग इसमें शामिल होते हैं, और लगभग हर हिस्से से विदेशी प्रतिभागी भी यहाँ दिखते हैं। मुख्य उत्सव परमार्थ निकेतन आश्रम में पवित्र गंगा के तट पर आयोजित होता है, लेकिन शहर के हर होटल और आश्रम में भी विशेषज्ञों और मेहमानों के नेतृत्व में योग और ध्यान सत्र होते हैं। पूरे शहर का वातावरण ध्यान और योग की ऊर्जा से भरा होता है। मैं जिस होटल में रहा, वहाँ दैनिक कार्यक्रम में योग सत्र, ध्यान कक्षाएं, चिकित्सा सत्र और सत्संग शामिल थे। हमने सुबह गंगा के निजी घाट पर दिन की शुरुआत की। सूरज के उगते ही गंगा की लालिमा और बहता जल अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। सुबह की प्रार्थना और ध्यान से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है। भोजन भी योग का हिस्सा है। नाश्ते में ताज़े फल, रस और ज्यादातर शाकाहारी व्यंजन होते हैं। पहली बार मुझे ऐसा लगा...

स्विट्जरलैंड में दुनिया के दो सबसे रहने योग्य शहर क्यों हैं

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  जब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों की रैंकिंग की बात आती है, तो स्कैंडिनेविया आमतौर पर शीर्ष पर रहता है। हम डेनमार्क, फिनलैंड और नॉर्वे को  दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची  में सबसे आगे देखते आए हैं - लेकिन एक और यूरोपीय देश चुपचाप दुनिया में रहने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक होने का दावा पेश कर रहा है। इस वर्ष के ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स  और  स्मार्ट सिटी इंडेक्स  में कई शहरों के शीर्ष 10 में शामिल होने से  स्विट्जरलैंड यह दर्शाता है कि उसकी नीतियां राष्ट्रव्यापी प्रभाव डालती हैं।  ज्यूरिख और जिनेवा ने स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करते हुए शीर्ष 10 सबसे रहने योग्य शहरों में जगह बनाई; वहीं ज्यूरिख को बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में शीर्ष स्थान के लिए नंबर एक स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला, जिनेवा चौथे स्थान पर और लॉज़ेन सातवें स्थान पर रहा। पांच अन्य देशों से घिरे एक छोटे देश के रूप में, स्विट्जरलैंड अपने अस्तित्व के दौरान विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं से प्रभावित रहा है, जिसके परिणामस्वरूप शासन की सकारात्मक शैली विकसित...

मनाली बादलों के बीच बसा एडवेंचर का स्वर्ग

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  कुल्लू घाटी के अंत में स्थित, मनाली न केवल हिमाचल प्रदेश के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि भी है। मनाली समानार्थी धाराएं और पक्षियों, जंगलों और बागानों और बर्फ से ढके पहाड़ों की भतीजी हैं।  मनाली एक प्राचीन व्यापार मार्ग का असली प्रारंभिक बिंदु है जो रोहतंग और बारालाचा पास पार करता है, और लाहुल और लद्दाख के माध्यम से कश्मीर में चलता है जबकि अलग सड़क इसे स्पीति से जोड़ती है।  अब जम्मू-कश्मीर में लेह, चंबा में पंगी घाटी और लाहुल और स्पीति के काजा तक मोटर लिंक प्रदान किए गए हैं। गर्मी के मौसम के दौरान मनाली से इन स्थानों पर नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। यह कुल्लू से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मनाली के बारे में एक दिलचस्प किंवदंती है जो कहती है कि ‘मनु संहिता’ के लेखक मनु, इस देश में एक जगह पर खगोलीय नाव से पहली बार पृथ्वी पर चले गए। वह विशेष स्थान जहां उन्होंने अपना निवास स्थापित किया था, वर्तमान मनाली थी जिसे मनु के निवास स्थान ‘मनु-अलाया’ के बदले नाम के रूप में जाना जाता है। मनु के लिए समर्पित मंदिर अभी भी मनाली गांव में मौजूद...

मथुरा: श्री कृष्ण की जन्मभूमि और भक्ति का हृदय स्थल

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 यमुना के किनारे बसी प्राचीन और पवित्र नगरी मथुरा, भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली के रूप में भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक तीर्थस्थली है, जो अपनी आध्यात्मिक शांति, भक्तिपूर्ण वातावरण और अनगिनत मंदिरों के लिए दुनियाभर में जानी जाती है । उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में स्थित यह शहर न केवल कृष्ण-भक्ति का केंद्र है, बल्कि यहाँ की गलियों में, यमुना के घाटों पर और कण-कण में कृष्ण की बाल-लीलाओं का आभास होता है।  मथुरा का सबसे मुख्य आकर्षण कृष्ण जन्मभूमि मंदिर है, जहाँ का दर्शन पाकर भक्त खुद को धन्य महसूस करते हैं। इसके अलावा, शाम के समय विश्राम घाट पर होने वाली यमुना आरती का दृश्य बहुत ही मनमोहक और अलौकिक होता है, जहाँ हजारों दीये पानी में तैरते हुए एक अद्भुत नजारा पेश करते हैं।  ऐतिहासिक रूप से, यह शहर प्राचीन काल से ही शिक्षा और संस्कृति का केंद्र रहा है, जिसे श्री कृष्ण की 'ब्रज भूमि' के नाम से भी जाना जाता है। मथुरा के समीप ही वृन्दावन, गोवर्धन और गोकुल जैसे पवित्र स्थान हैं, जो मथुरा यात्रा को और भी विशेष बनाते हैं।  यहाँ का स्वादिष्ट पेड़ा, ब्रज की संस्क...

बाड़मेर भारत का पांचवां सबसे बड़ा जिला

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  28,387 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला बाड़मेर राजस्थान के बड़े जिलों में शामिल है। राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित होने के कारण यह थार रेगिस्तान का हिस्सा भी समेटे हुए है। उत्तर में जैसलमेर, दक्षिण में जालोर, पूर्व में पाली और जोधपुर इसके पड़ोसी जिले हैं, जबकि पश्चिम में पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण यहाँ का तापमान काफी चरम परिस्थितियों में बदलता है। Read Also : राजस्थान का सदाबहार हिल स्टेशन माउंट आबू  गर्मियों में तापमान 51°C तक पहुँच सकता है और सर्दियों में 0°C तक गिर जाता है। बाड़मेर जिले की सबसे लंबी नदी लूणी है, जो लगभग 500 किमी की दूरी तय करने के बाद जालोर से होकर गुजरती है और कच्छ के रण में विलीन हो जाती है। 12वीं शताब्दी में इस क्षेत्र को “मल्लानी” के नाम से जाना जाता था। वर्तमान नाम बाड़मेर इसके संस्थापक बहादुर राव (जुना बाड़मेर) के नाम पर रखा गया। उन्होंने एक छोटा नगर बसाया जिसे आज “जुना” कहा जाता है, जो वर्तमान बाड़मेर शहर से लगभग 25 किमी दूर है। परमार वंश के बाद, रावत लुका (रावल मल्लीनाथ के पौत्र) ने अपने भाई रावल मंडलाक ...

switzerland 57 किलोमीटर लंबी इस दोहरी सुरंग का नाम गोटहार्ड है

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  57 किलोमीटर लंबी इस दोहरी सुरंग का नाम गोटहार्ड है जो आल्प्स पर्वतों के नीचे से उत्तरी और दक्षिणी यूरोप को तेज़ गति वाली रेल सेवा से जोड़ेगी. स्विट्ज़रलैंड का कहना है कि ये सुरंग यूरोप में मालवाहक परिवहन में क्रांतिकारी क़दम होगा. ये रेल लिंक नीदरलैंड्स के रोटरडैम और इटली के गेनोआ को जोड़ेगा. अभी तक इस मार्ग पर सामान की ढुलाई लाखों ट्रकों से होती रही है, लेकिन अब वो सामान इस सुरंग के ज़रिए रेल से जा सकेगा. अभी तक दुनिया में सबसे लंबी सुरंग जापान की 53.9 किमी 'सेइकन रेल' सुरंग थी. लेकिन अब ये उपलब्धि गोटहार्ड के नाम हो गई है. फ्रांस और ब्रिटेन को जोड़ने वाली 50.5 किलोमीटर लंबी चैनल सुरंग अब तीसरे स्थान पर आ गई है. गोटहार्ड रेल सुरंग के भव्य उद्घाटन समारोह में स्विस अधिकारियों के साथ साथ जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल, फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और इटली के प्रधानमंत्री मैतो रेंज़ी भी मौजूद रहेंगे. स्विट्ज़रलैंड के फेडरल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के निदेशक पीटर फ्यूगलिस्टर ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया, "यह स्विस पहचान का हिस्सा है गोटहार्ड दुनिया की सबसे गहरी सुरंग है. य...

कुर्ता, पायजामा, सलवार, कुर्ती भारत का पारंपरिक पोशाक

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  भारतीय सनातन संस्कृति का विशेष वस्त्र है कुर्ता एवं पजामा (पायजामा)। यह प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग शैली में पहना जाता है। कुर्ते को अफगानिस्तान में पैरहन, कश्मीर में फिरान और नेपाल में दौरा के नाम से जाना जाता है। राजस्थानी, भोपाली, लखनवी, मुल्तानी, पठानी, पंजाबी, बंगाली, हर कुर्ते की डिजाइन अलग होती है। जिस तरह पुरुष कुर्ता और पायजामा पहनते हैं उसी तरह महिलाएं कुर्ती और पायजामे (सलवार) के साथ चुनरी, ओढ़नी या दुपट्टा भी पहनती हैं। यह महिलाओं के लिए अलग शैली में निर्मित होता है। पंजाबी शैली, उत्तर भारतीय शैली (स्टाइल) आदि में निर्मित सलवार-कुर्ती महिलाओं के लिए सबसे उत्तम वस्त्र माना गया है।   जम्मू और कश्मीर में ठंड अधिक होने के कारण वहां की महिलाएं व पुरुष 'पैरहन' पहनते हैं। यह पोशाक पहाड़ी इलाकों में काफी प्रसिद्ध है। कश्मीर की महिलाएं सिर को दुपट्टे से ढंककर पीछे से बांध लेती हैं। हालांकि वर्तमान में कट्टरपंथ के चलते वहां कश्मीरियत को छोड़कर अरबी संस्कृति के पहनावे पर जोर दिया जा रहा है। 'सलवार' नामक चौड़े पायजामे से पैर ढंका रहता था जबकि ऊपरी हिस्से में पूरे बांह...

90 के दशक का फैशन फिर ट्रेंड में, 2026 की गर्मियों में दिखा जबरदस्त असर

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  क्या आपको भी लगता है कि इन दिनों हर जगह 90 के दशक की झलक दिखाई दे रही है? चाहे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म हों या सोशल मीडिया, हर तरफ वही पुराना लेकिन दमदार स्टाइल छाया हुआ है। दोस्तों के ग्रुप चैट से लेकर वीकेंड पार्टियों तक, हर जगह 90s थीम का ही जलवा देखने को मिल रहा है। इस गर्मी 2026 में फैशन का ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है। लोग मॉडर्न, सादे और फिट कपड़ों को छोड़कर अब ढीले-ढाले, रंग-बिरंगे और ग्रंज स्टाइल को अपना रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे सड़कों पर पुराना म्यूजिक चैनल वाला दौर वापस आ गया हो। Read Also : मूगा रेशम परंपरा दो हज़ार वर्षों से भी अधिक पुरानी हालांकि अक्सर 2026 की तुलना 2016 से की जाती है, लेकिन फैशन इंडस्ट्री ने इस बार अलग रास्ता चुना है। इस बार ट्रेंड सीधे 1990 के दशक से प्रेरित है। मिनिमल और सिंपल कपड़ों की जगह अब बोल्ड कलर्स और आरामदायक आउटफिट्स ने ले ली है। मार्केट डेटा भी इस बदलाव की पुष्टि कर रहा है। फैशन प्लेटफॉर्म्स पर “बायस-कट” और “पैराशूट फैब्रिक” जैसे शब्दों की खोज तेजी से बढ़ी है। इसका मतलब साफ है—लोग अब टाइट और असहज कपड़ों से दूर जा रहे हैं और हल्के, सांस ले...